Friday, December 7, 2012

कुछ अलग कर देखे



तमन्ना मन में है यह उठी,
खुद से रूबरू हो कर आज,
एक खूबसूरत ख्वाब देखे,
निगाहों से धोखे खाए कई,
मगर आज निगाहों से ही,
एक धोखा कर कर देखे ,
हवा के संग रेत से चलते रहे,
सोचा आज तूफान बन,
बहने की मस्ती समझ देखे,
रोशन जहान सितारों से हुआ,
चाह हुई की आतिशबाजी से,
आसमान रोशन कर देखे|
कदमो में बेडिया बहुत डाली ,
सोचा आज तोड़ हर बंधन ,
कदमो की असल रफ़्तार देखे ,
अश्क बहाए हर मुश्किल में ,
अब मुश्किल का सामना,
मुश्कुराहट के संग कर देखे,
खुदा की बहुत इबादत कर ली ,
अब जीत का ज़ज्बा लेकर ,
खुद को आजमाकर देखे ,
जिंदगी में कई मोड गुज़रे ,
तकदीर के लिखे से अलग ,
अपनी राह बनाकर देखे  |


2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-12-2012) के चर्चा मंच-१०८८ (आइए कुछ बातें करें!) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  2. सुंदर कविता, बढ़िया प्रस्तुति.

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